Discover the rich Maithili culture of Sitamarhi
Major Festivals celebrated in Sitamarhi
Vivah Panchami
भगवान राम और सीता जी के विवाह का उत्सव। मार्गशीर्ष मास में मनाया जाता है। जानकी मंदिर में भव्य आयोजन होता है।
Ram Navami
भगवान राम के जन्मोत्सव का पर्व। चैत्र मास शुक्ल पक्ष नवमी को मनाया जाता है। पूरे शहर में भव्य शोभायात्रा निकलती है।
Chhath Puja
सूर्य देव की उपासना का महापर्व। कार्तिक मास में चार दिवसीय व्रत। बागमती नदी घाट पर लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं।
Sita Navami
माता सीता के प्राकट्य दिवस का उत्सव। वैशाख शुक्ल नवमी को मनाया जाता है। पुनौरा धाम में विशेष पूजा होती है।
Holi
रंगों का त्योहार। फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। मिथिला की होली अपने लोकगीतों के लिए प्रसिद्ध है।
Makar Sankranti
तिल-गुड़ और दही-चूड़ा का त्योहार। 14 जनवरी को मनाया जाता है। पतंगबाजी और स्नान-दान का विशेष महत्व है।
Sama Chakeva
भाई-बहन के प्रेम का मिथिला पर्व। मिट्टी की मूर्तियों (सामा-चकेवा) से लोककथा मंचित की जाती है और लोकगीत गाए जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को समापन होता है।
Fairs & Trade of Sitamarhi
Held every spring around Ram Navami, this large trade fair sees brisk business in pottery, spices, brassware and cotton cloth, drawing traders and visitors from across the region.
Sitamarhi hosts Bihar's largest cattle fair, an important seasonal gathering for farmers from across the state to trade livestock alongside the town's religious festivities.
Traditional Cuisine of Mithila Region
Litti Chokha
बिहार का सबसे प्रसिद्ध व्यंजन। सत्तू भरी गोल लिट्टी को कोयले पर सेंककर बैंगन-टमाटर के चोखा के साथ परोसा जाता है।
Thekua
छठ पूजा का मुख्य प्रसाद। गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है। मिथिला की पहचान है।
Makhana Kheer
सीतामढ़ी के प्रसिद्ध मखाना से बनी खीर। दूध, चीनी और मेवों के साथ बनती है। बेहद स्वादिष्ट।
Sattu Paratha
भुने चने के सत्तू से भरा पराठा। गर्मियों का लोकप्रिय भोजन। पोषक तत्वों से भरपूर।
Dahi Chura
मकर संक्रांति का विशेष व्यंजन। चिवड़ा (चूड़ा) को दही और गुड़ के साथ मिलाकर खाया जाता है।
Tilkut
तिल और चीनी से बनी मिठाई। मकर संक्रांति पर विशेष रूप से बनाई जाती है। कुरकुरा और स्वादिष्ट।
Art & Folk Traditions of Mithila
Maithili Folk Music
मैथिली लोकगीत विवाह, छठ, होली जैसे अवसरों पर गाए जाते हैं। "सोहर", "समदाउन", "बटगमनी" और "नचारी" प्रमुख शैलियाँ हैं। विद्यापति के गीत आज भी लोकप्रिय हैं।
मिथिला की संगीत परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। विद्यापति को मैथिली के शेक्सपियर के रूप में जाना जाता है।
Folk Theatre
मिथिला का लोक नाट्य "विदापत नाच" बहुत प्रसिद्ध है। "डोमकच", "झिझिया" और "सामा-चकेवा" जैसे लोक नृत्य यहाँ की सांस्कृतिक पहचान हैं। ये पारंपरिक कला आज भी जीवित हैं।
ये लोक नाट्य त्योहारों और विशेष अवसरों पर मंचित किए जाते हैं।
Madhubani Art
मिथिला की विश्व प्रसिद्ध चित्रकला। दीवारों और कागज पर प्राकृतिक रंगों से बनाई जाती है। रामायण, कृष्ण लीला और प्रकृति के दृश्य प्रमुख विषय हैं। GI Tag प्राप्त है।
मधुबनी पेंटिंग को UNESCO ने सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है।
Language & People of Sitamarhi
सीतामढ़ी की प्रमुख भाषा मैथिली है, जो भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में से एक है। हिंदी और उर्दू भी बोली जाती हैं। मैथिली की अपनी लिपि (तिरहुता) है, हालांकि अब देवनागरी में अधिक लिखी जाती है।
Maithili is the primary language, one of India's 22 scheduled languages. Hindi and Urdu are also spoken. Maithili has its own script (Tirhuta) though Devanagari is now commonly used.
प्रणाम
Pranam
अहाँ केना छी?
Ahaan kena chhi?
हम नीक छी
Ham neek chhi
धन्यवाद
Dhanyavaad
ई कतेक दूर छै?
E katek door chhai?
बहुत नीक
Bahut neek